शनिवार, 21 फ़रवरी 2015
हरिद्वार में घर खरीदने का बढ़ता क्रेज
हरिद्वार समाज के सभी वर्गों को लुभा रहा है, जिसमें बुजुर्ग, युवा, महिलाएं इत्यादि सभी शामिल हैं। कई बुजर्ग हैं, जो सेवानिवृत्त होने के बाद हरिद्वार या ऋषिकेश जैसी जगहों पर बसने का मन बना रहे हैं, जबकि युवा हिल स्टेशन में अपना घर बनाने की चाह में यहां का रुख कर रहे हैं। इसके अलावा कई कॉरपोरेट वंâपनियां भी यहां घर ले रही हैं। इनका उद्देश्य यहां स्प्रियुअल वर्वâशॉप का आयोजन करना होता है, साथ ही वे यहां अपने ग्राहक को रहने की मुफ्त सुविधा देती हैं। कई ऐसे लोग भी है, जिनका पूरा का पूरा परिवार बाबा रामदेव या ऐसे किसी और गुरु का अनुयायी है। ये लोग साल में एक बार जरुर इन गुरुओं के आश्रम में आते हैं, लिहाजा वे वहां पर घर लेना पसंद करते हैं, ताकि रहने की कोई समस्या न हो।
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उड़ीसा के एक मालदार मित्र हैं। उन्होंने ज्यादातर जगहों पर अपना घर खरीदा है। मसलन, दिल्ली में उनका घर है, तो मथुरा और हरिद्वार में भी और भी न जानें कहां-कहां! उन्होंने अपना कारोबार अब अपने बच्चों के हवाले कर दिया है और खुद पत्नी के साथ कभी दिल्ली, कभी मथुरा, तो कभी हरिद्वार में रहते हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें होटल लेना पड़ता था, लेकिन बाद में उन्होंने तय किया कि जब साल में एकाध बार उन्हें इन जगहों पर घूमने जाना ही होता है, तो क्यों न अपना ही घर ले लें। उनके मुताबिक, वैसे भी प्रॉपर्टी में निवेश करके नुकसान नहीं, बल्कि लाभ ही होना है और अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टी होगी, तो उनके रखरखाव के बहाने वे घूम-फिर आएंगे।
बहरहाल ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो मुख्य शहरों में बार-बार होटल में ठहरने की बजाय अपना मकान लेने में दिलचस्पी रखते हैं। उदाहरण स्वरूप दिल्ली और इसके आस-पास के इलाके में ऐसे बहुत से घर हैं, जिनके दरवाजे साल में कभी-कभार ही खुलते हैं। ये घर दिल्ली से बाहर वालों के हैं। किसी ने निवेश के हिसाब से, तो किसी ने अन्य कारणों से ये घर खरीदे हैं।
खैर, इन दिनों निवेशकों में कुछ ऐसा ही झुकाव हरिद्वार को लेकर दिख रहा है यानी कोई धार्मिक, तो कोई सामाजिक कारण से हरिद्वार में मकान खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है। यही वजह है कि बिल्डर भी ऐसे मौकों को भुनाने में पीछे नहीं रहना चाहते हैं और उन्होंने यहां प्रॉपर्टी का बाजार सजा दिया है।
दरअसल, हरिद्वार समाज के सभी वर्गों को लुभा रहा है, जिसमें बुजुर्ग, युवा, महिलाएं इत्यादि सभी शामिल हैं। कई बुजर्ग हैं, जो सेवानिवृत्त होने के बाद हरिद्वार या ऋषिकेश जैसी जगहों पर बसने का मन बना रहे हैं, जबकि युवा हिल स्टेशन में अपना घर बनाने की चाह में यहां का रुख कर रहे हैं। इसके अलावा कई कॉरपोरेट वंâपनियां भी यहां घर ले रही हैं। इनका उद्देश्य यहां स्प्रियुअल वर्वâशॉप का आयोजन करना होता है, साथ ही वे यहां अपने ग्राहक को रहने की मुफ्त सुविधा देती हैं। कई ऐसे लोग भी है, जिनका पूरा का पूरा परिवार बाबा रामदेव या ऐसे किसी और गुरु का अनुयायी है। ये लोग साल में एक बार जरुर इन गुरुओं के आश्रम में आते हैं, लिहाजा वे वहां पर घर लेना पसंद करते हैं, ताकि रहने की कोई समस्या न हो। असल में, उत्तराखंड में मकान खरीदने के पीछे कई कारण हैं। मसलन, जो लोग अपना दूसरा घर खरीदना चाहते हैं, उन्हें दिल्ली या अन्य शहरों के मुकाबले यहां काफी कम कीमत में अच्छा मकान मिल जाता है।
ज्यादातर बिल्डर मानते हैं कि उत्तराखंड की हॉट लोकेशन हरिद्वार हैं, क्योंकि इसका धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्व है, इसलिए यह लोगों को सबसे ज्यादा लुभाता है। इसके बाद लोगों को ऋषिकेश, मंसूरी और देहरादून भी लुभाते हैं। कुल मिलाकर जमीन-जायदाद का बाजार यहां गर्म है। यही वजह है कि इन जगहों पर अपार्टमेंट बनने शुरू हो गए हैं।
उत्तराखंड में मॉल कल्चर भी अपनी झलक दिखा रहा है, जो इस बात की दस्तक है कि यहां कमर्शियल प्रॉपर्टी का बाजार भी पैâल रहा है। दरअसल, उत्तराखंड में कमर्शियल प्रॉपर्टी का भी खासा स्कोप बन रहा है। ऐसे कई लोग हैं, जो वहां रहना नहीं चाहते हैं, केवल आमदनी के लिए घर खरीद रहे हैं। ये लोग इन जगहों पर घर खरीद कर सैलानियों को किराए पर रहने के लिए देते हैं। बिल्डरों की मानें तो इन जगहों पर घर खरीदते समय लोग जीवनशैली की सुविधाओं को ज्यादा तरजीह नहीं देते है। वे सुरक्षा पर ज्यादा फोकस नहीं करते हैं। ज्यादातर लोग स्टूडियो अपार्टमेंट ही पसंद करते हैं, जबकि बहुत कम लोग विला या लग्जरी मकान में निवेश करना चाहते हैं यानी ज्यादातर लोग सामान्य सुविधाओं की मांग करते हैं, जिनमें बिजली-पानी मुख्य हैं। दरअसल यहां आने वाले निवेशकों का मुख्य उद्देश्य अपना दूसरा घर लेने का होता है, इसलिए ज्यादातर निवेशकों का लक्ष्य कम-से-कम पैसा खर्च करना होता है। अमूमन उनका बजट २०-२५ लाख रुपये का होता है। इसकी अपार्टमेंट खरीद रहे हैं या फिर उन्हें आधुनिक शैली में बदल रहे हैं, जो उनके लिए कमाई का जरिया बन सवेंâ।
बहरहाल, इस आलेख को पढ़ने के बाद आप भी उत्तराखंड में अपना दूसरा घर चाहते हैं, तो थोड़ा सावधानी बरतें, क्योंकि जहां भीड़ बढ़ती है, वहां ठगने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है। ऐसे में मकान खरीदने से पहले कुछ बातों पर विशेष तौर पर गौर कर लीजिएगा। मसलन, प्रॉपर्टी का मालिक कौन है? इसकी भी जांच की जानी चाहिए कि प्रॉपर्टी वैद्य है या नहीं। केवल सुनी-सुनाई बातों पर मकान खरीदना घाटे का सौदा भी साबित हो सकता है।
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